2018 से हर साल टॉप 15 क्रिप्टोकरेन्सीज़ की मार्केट कैप ट्रैक करने वाले चार्ट में एक साफ पैटर्न दिखता है। Bitcoin कभी भी पहले नंबर से नहीं हटता।
अधिकतर altcoins जो एक समय टॉप रैंकिंग के लिए कंपटीशन कर रहे थे, या तो काफी गिर चुके हैं या पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
Bitcoin 2018 से 2026 तक हर साल टॉप पोजीशन पर बना रहता है। इस दौरान क्रिप्टो मार्केट कई bear मार्केट्स, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में रेग्युलेटरी crackdowns और नए competitors की wave देखती है।
Bitcoin की रैकिंग कभी बदलती नहीं है। बाकी के टॉप 15 coins के बीच shuffled होता रहता है लेकिन यह हर साल नंबर एक पर बना रहता है।
Ethereum 2018 से लगातार दूसरे नंबर पर है और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट प्लेटफॉर्म में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। इतने सालों तक competitors आते रहे, लेकिन कोई भी इसे पीछे नहीं छोड़ सका।
XRP में ज्यादा वोलैटिलिटी रही है, लेकिन यह टॉप 10 से कभी बाहर नहीं हुआ। 2018 में दूसरी पोजिशन से 2026 में तीसरी पोजिशन पर पहुंच गया, बावजूद इसके कि बहुत लंबा SEC lawsuit भी चला जो कई प्रोजेक्ट्स को खत्म कर सकता था। 2018 में ट्रैक किए गए ओरिजिनल 20 में से सिर्फ Bitcoin, Ethereum और XRP ही टॉप रैंकिंग में टिके रहे।
2018 के टॉप 15 में मौजूद आधे से ज्यादा क्रिप्टो 2026 में टॉप 20 से पूरी तरह बाहर हो गए। IOTA, NEM, Dash, NEO, Qtum, EOS, Bitcoin Gold, Nano, Verge और Ethereum Classic को कभी बड़े प्रोजेक्ट माना जाता था। इन्वेस्टर्स डिबेट करते थे कि इनमें से कौन अगला
Ethereum बनेगा। EOS ने अपने ICO में $4 बिलियन जुटाए थे। Dash को दुनिया की डिजिटल कैश के तौर पर प्रमोट किया गया था। आज ये सभी टॉप 20 में जगह नहीं बना पाए हैं।
इनकी जगह नए कॉइन ने ले ली है, जिससे क्रिप्टो मार्केट में बड़ा बदलाव दिखता है। Solana ने अनजान स्थिति से टॉप 5 में एंट्री मारी। Dogecoin, जिसे मजाक के तौर पर बनाया गया था, अब टॉप 10 में है। Hyperliquid 2018 में था ही नहीं और अब यह दशक पुराने नामों के साथ कॉम्पिटिशन में है।
यह चार्ट एक पैटर्न दिखाता है: जितनी ऊँची रैंकिंग, पोजीशन उतनी ही स्टेबल रहती है। नंबर एक पर Bitcoin कभी अपनी जगह नहीं छोड़ता। नंबर दो पर Ethereum भी लगभग नहीं हिलता। XRP टॉप 10 में ऊपर-नीचे होता रहता है लेकिन वहीं बना रहता है।
टॉप 10 के नीचे वॉलेटिलिटी बढ़ जाती है। प्रोजेक्ट्स एक ही साइकिल में दस पोजीशन ऊपर जा सकते हैं या पूरी तरह से रैंकिंग से बाहर हो सकते हैं। 2018 के टॉप 15 में से जो गायब हुए, उनमें से ज़्यादातर छठवें से पंद्रहवें पोजीशन तक से थे।
यह चार्ट दिखाता है कि क्रिप्टो में सिर्फ प्राइस के उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि रैंकिंग्स में वॉलेटिलिटी भी है। रैंकिंग बदलती रहती है। जो प्रोजेक्ट्स एक साइकिल में डोमिनेट करते हैं, वे अगली साइकिल में गायब भी हो सकते हैं। मार्केट कैप पोजीशन जो आज सुरक्षित लगती है, कुछ सालों में पूरी तरह से बदल सकती है।
यह डेटा आठ साल की अवधि को कवर करता है। इस दौरान सिर्फ तीन क्रिप्टोकरेंसी अपनी टॉप पोजीशन पर बनी रहीं। दस पूरी तरह से टॉप 20 से बाहर हो गईं। बाकी गिर गईं लेकिन रैंकिंग में कहीं न कहीं बनी रहीं। क्रिप्टो मार्केट को अक्सर हाई-रिस्क कहा जाता है, डेटा दिखाता है कि यह रिस्क सिर्फ प्राइस में नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट की relevance यानी कितनी जरूरी है, उसमें भी नजर आता है।
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