XRPL Commons और Boundless ने एक नई इंटीग्रेशन पेश की है जिससे XRP Ledger (XRPL) में zero-knowledge (ZK) proof टेक्नोलॉजी आ गई है।
14 अप्रैल 2026 को XRPL Zone Paris में यह एलान किया गया। यह इनिशिएटिव खासतौर पर उन इंस्टीट्यूशनल यूज़र्स के लिए है, जिन्हें कॉन्फिडेंशियल ट्रांजैक्शंस करनी होती हैं, लेकिन ऑडिटेबिलिटी या रेग्युलेटरी कंप्लायंस से कोई समझौता नहीं करना चाहते।
इस इंटीग्रेशन की मदद से इंस्टीट्यूशंस स्टेबलकॉइन पेमेंट्स कर सकते हैं, ट्रेजरी पोजीशन मैनेज कर सकते हैं और Decentralized Finance (DeFi) प्रोटोकॉल्स को एक्सेस कर सकते हैं, वो भी बिना ऑन-चेन ट्रांजैक्शन डीटेल्स एक्सपोज किए। इसमें सपोर्टेड स्टेबलकॉइन्स हैं – Ripple USD (RLUSD), USDC (USDC), और Tether (USDT)।
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ट्रांजैक्शन अमाउंट, काउंटरपार्टियां, और टाइमिंग पब्लिक व्यू से छुपी रहती हैं। लेकिन सिस्टम पूरी ऑडिटेबिलिटी और रेग्युलेटरी कंप्लायंस बरकरार रखता है।
ओवर-द-काउंटर पोजीशन, क्रॉस-एंटीटी ट्रांसफर और यील्ड डिप्लॉयमेंट्स भी ऐसे हो सकते हैं जिसमें स्ट्रैटेजी या काउंटरपार्टी इंफॉर्मेशन पब्लिकली शेयर नहीं करनी होगी। इससे वह मुख्य समस्या हल होती है, जो इंस्टीट्यूशंस को DeFi में भाग लेने से रोकती थी पब्लिक ब्लॉकचेन्स पर।
यह इंटीग्रेशन फिलहाल XRPL के टेस्टनेट वातावरण में डेवलपर्स के लिए उपलब्ध है। साथ ही, इसे XRPL Commons के हालिया हैकाथॉन में भी यूज़ किया गया था। मेननेट कंफर्मेशन अभी नहीं हुआ है।
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The post XRP Ledger में प्राइवेट इंस्टीट्यूशनल DeFi के लिए Zero-Knowledge Proofs की सुविधा appeared first on BeInCrypto Hindi.


