जापान की चार सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने ब्लॉकचेन ट्रायल की शुरुआत की है, जिसमें सरकारी बॉन्ड गारंटी को डिजिटल तरीके से मैनेज किया जाएगा। इस एक्सपेरिमेंट का मकसद है कि जापानी गवर्नमेंट बॉन्ड की ट्रेडिंग 24×7, देश और विदेश दोनों जगह मुमकिन हो सके।
यह कदम दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन क़र्ज़ मार्केट्स में से एक में गारंटी मैनेजमेंट को बॉर्डर और टाइम ज़ोन के पार पूरी तरह बदल सकता है।
Mizuho Financial Group, Nomura Holdings, Japan Securities Clearing Corporation और Digital Asset ने सोमवार को इस जॉइंट एक्सपेरिमेंट की घोषणा की। वे Canton Network (एक ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म, जो खास तौर पर इंस्टीट्यूशनल फाइनेंस और कैपिटल मार्केट्स के लिए बनाया गया है) का इस्तेमाल करेंगे। क्लियरिंग हाउस, Japan Exchange Group का पूरी तरह स्वामित्व वाला हिस्सा है जो देश का मुख्य स्टॉक मार्केट ऑपरेटर है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए यह जांचा जाएगा कि क्या ब्लॉकचेन मल्टीपल अकाउंट मैनेजर्स के बीच बॉन्ड ओनरशिप का ट्रांसफर संभाल सकता है या नहीं। साथ ही, यह भी टेस्ट किया जाएगा कि क्लियरिंग हाउस, इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच रियल-टाइम गारंटी एक्सचेंज संभव है या नहीं। जापानी गवर्नमेंट बॉन्ड पूरे ट्रायल के दौरान रजिस्टर्ड सिक्योरिटी का कानूनी दर्जा बरकरार रखेंगे।
जापान की Financial Services Agency ने फरवरी में अपने Payment Innovation Project के तहत इस ट्रायल को औपचारिक मंजूरी दी थी। रेग्युलेटर्स यह भी देखेंगे कि क्या जापानी क़ानून में कोई बदलाव जरूरी है ताकि पूरी तरह ब्लॉकचेन-बेस्ड बॉन्ड ट्रेडिंग अलाऊ की जा सके। Nikkei के मुताबिक, चारों पार्टनर सितंबर के अंत तक अपना काम पूरा करने का प्लान बना रहे हैं।
Canton Network पर पहले से ही JPMorgan और Goldman Sachs जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल जायंट्स के ऐसे कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। US के क्लियरिंग हाउस DTCC भी इस नेटवर्क का इस्तेमाल करके American Treasury बॉन्ड को टोकनाइज़ कर रहा है। जापान का यह कदम एशिया की सबसे अहम सेफ-हैवन एसेट्स में से एक को ग्लोबल फाइनेंशियल इकोसिस्टम में शामिल कर रहा है।
गारंटी (Collateral) मैनेजमेंट आमतौर पर दुनियाभर के अलग-अलग इंस्टीट्यूशन्स, कंप्यूटिंग सिस्टम्स और कई तरह के लीगल जुरिस्डिक्शन के बीच कॉम्प्लेक्स कोऑर्डिनेशन मांगता है। ब्लॉकचेन पर यह प्रोसेस शिफ्ट होने से पेपरवर्क कम हो सकता है, सेटलमेंट डिले घट सकता है और बड़े बैंकों के लिए कैपिटल फ्री हो सकता है। जापानी अफसरों को उम्मीद है कि यह ट्रायल, टोक्यो को तेजी से बढ़ते ग्लोबल डिजिटल एसेट रेस में ज्यादा कॉम्पिटिटिव बना देगा।
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